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सूचना का अधिकार क्या है? — RTI Act 2005
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act) हर भारतीय नागरिक को यह कानूनी अधिकार देता है कि वह किसी भी सरकारी दफ्तर — केंद्र, राज्य, ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, या नगरपालिका — से जानकारी मांग सके। यह कानून 12 अक्टूबर 2005 से लागू है। इसके तहत हर सरकारी विभाग में एक “जन सूचना अधिकारी (PIO)” होता है जिसका कानूनी कर्तव्य है आपकी अर्ज़ी पर 30 दिन के भीतर जवाब देना। नहीं देता तो उस पर ₹25,000 तक का जुर्माना लग सकता है।
आरटीआई क्यों ज़रूरी है
- पारदर्शिता: जो सरकार आपके पैसे से चलती है, उसका हिसाब आपका हक है।
- जवाबदेही: PIO जब लिखकर जवाब देगा, तो आप उसे अदालत/CIC में चुनौती दे सकते हैं।
- समस्या-निवारण: अटका हुआ पासपोर्ट, फंसा PF, ना मिला राशन कार्ड — आरटीआई से दबाव बनता है।
- पत्रकारिता: अधिकांश घोटालों का खुलासा आरटीआई से ही हुआ है।
आपका अधिकार क्या है (धारा 3)
हर नागरिक (नाबालिग सहित) किसी भी सरकारी प्राधिकरण से कोई भी जानकारी माँग सकता है — बशर्ते वह धारा 8 की छूट के दायरे में न आए। आपको कारण बताने की ज़रूरत नहीं।
कौन सरकारी प्राधिकरण कहलाता है (धारा 2(h))
- सभी मंत्रालय + विभाग (केंद्र + राज्य)।
- सभी ज़िला कार्यालय।
- सरकारी कंपनियाँ (PSU) — SBI, LIC, BHEL, IRCTC आदि।
- सरकारी सहायता प्राप्त संस्थाएँ — स्कूल, कॉलेज, NGO जिन्हें सरकारी अनुदान मिलता है।
- राजनीतिक दल — CIC के 2013 के पूर्ण-पीठ आदेश के अनुसार 6 राष्ट्रीय दल।
कौन-सी जानकारी आरटीआई से मांग सकते हैं
- फ़ाइल नोटिंग्स (R.K. Jain v. UoI, 2013)
- अपनी सेवा-पुस्तिका, APAR (Aditya Bandopadhyay, 2011)
- सरकारी टेंडर के दस्तावेज़
- किसी योजना के लाभार्थी सूची (PMAY, MGNREGA, PDS)
- अदालत के आदेश + निर्णय
- बजट आबंटन व खर्च
- पुलिस केस का स्टेटस (जाँच पूरी होने के बाद)
कौन-सी जानकारी नहीं मांग सकते (धारा 8)
- राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित — §8(1)(a)
- अदालत द्वारा रोकी गई — §8(1)(b)
- संसदीय विशेषाधिकार भंग — §8(1)©
- व्यापारिक विश्वास/ट्रेड सीक्रेट — §8(1)(d) (सार्वजनिक हित में छूट)
- न्यायिक विश्वास (वकील-मुवक्किल आदि) — §8(1)(e)
- किसी की जान-माल को खतरा — §8(1)(g)
- जारी जाँच में बाधा — §8(1)(h) (केवल जब तक जाँच चल रही)
- कैबिनेट दस्तावेज़ — §8(1)(i) (निर्णय के बाद खोलना ज़रूरी)
- व्यक्तिगत जानकारी — §8(1)(j) (सार्वजनिक हित में छूट)
अर्ज़ी कैसे दर्ज करें — संक्षेप में
- लिखित अर्ज़ी — सादे कागज़ पर साधारण अंग्रेज़ी/हिंदी में।
- PIO का नाम — अगर पता हो; नहीं तो “जन सूचना अधिकारी, [विभाग का नाम]“।
- जानकारी का विवरण — स्पष्ट, बिंदुवार। एक बार में एक विषय।
- ₹10 शुल्क — IPO (इंडियन पोस्टल ऑर्डर) से, या rtionline.gov.in पर ऑनलाइन।
- डाक से — रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें ताकि रसीद हो।
विस्तार से: आरटीआई कैसे दर्ज करें - चरण-दर-चरण।
समय-सीमा
- PIO जवाब: 30 दिन (जीवन/स्वतंत्रता पर 48 घंटे)
- पहली अपील: आदेश से 30 दिन के भीतर
- FAA जवाब: 30-45 दिन
- दूसरी अपील: FAA आदेश से 90 दिन के भीतर CIC/SIC को
दंड
- धारा 20(1): बिना उचित कारण के जवाब न देने पर ₹250/दिन, अधिकतम ₹25,000 PIO के वेतन से कटौती।
- धारा 19(8)(b): हर्जाना — विलंब से हुई हानि के लिए आपको मिल सकता है।
मुख्य न्यायालयिक निर्णय (हिंदी संक्षेप में)
- CBSE v. Aditya Bandopadhyay (SC 2011): उत्तर-पुस्तिका सूचना है, छात्र को दिखानी होगी।
- R.K. Jain v. UoI (SC 2013): फ़ाइल नोटिंग कैबिनेट दस्तावेज़ नहीं; निर्णय के बाद खोलनी होगी।
- RBI v. Jayantilal Mistry (SC 2016): बैंक निरीक्षण रिपोर्ट खोलनी होगी; “विश्वास” बहाना नहीं।
- Girish Deshpande (SC 2013): §8(1)(j) पर तीन-भाग परीक्षण।
- Bhagat Singh v. CIC (Delhi HC 2007): §8(1)(h) तभी लागू जब जाँच जारी।
टूल्स
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अंतिम समीक्षा: 23 अप्रैल 2026.
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